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वैश्विक महामारी संधि- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता
- जीएस पेपर 2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध- महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियां एवं मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।
वैश्विक महामारी संधि चर्चा में क्यों है?
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन/डब्ल्यूएचओ) ने 80 से अधिक देशों (अगस्त 2022) से 32,000 से अधिक मामलों के साथ मंकी-पॉक्स के प्रकोप को अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न/पीएचईआईसी) घोषित किया है।
- इससे विश्व के समक्ष एक और स्वास्थ्य संकट का खतरा मंडरा रहा है।
- विश्व स्वास्थ्य सभा (WHASS) के विशेष सत्र में एक वैश्विक महामारी संधि का प्रस्ताव किया गया था।
- अंतर्निहित तर्क यह था कि जैसा कि वैश्विक शासन महामारी के दौरान विफल रहा था, हमें भविष्य की चुनौतियों का शमन करने हेतु राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता थी।
विश्व पर कोविड-19 महामारी का प्रभाव
- कोविड-19 को विगत 100 वर्षों में देखे गए विश्व की कुछ सर्वाधिक गंभीर महामारियों में गिना जाएगा।
- मृत्यु: कोविड-19 से अनुमानित 18 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई है, विभिन्न विश्वसनीय अनुमानों के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात से इतने वृहद स्तर की हानि नहीं देखी गई।
- अर्थव्यवस्था: 120 मिलियन से अधिक लोगों को अत्यधिक निर्धनता की ओर धकेल दिया गया है तथा एक विशाल वैश्विक मंदी के साथ, कोई भी सरकार या संस्थान अकेले इस आपात स्थिति से निपटने में सक्षम नहीं है।
व्यापक वैश्विक स्वास्थ्य असमानता
- व्यापक असमानता: स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को उनकी क्षमता से अधिक विस्तारित किया गया है एवं संपूर्ण विश्व में टीकों, निदान तथा चिकित्सा विज्ञान के वितरण में सकल स्वास्थ्य असमानता देखी गई है।
- जबकि उच्च-आय वाली अर्थव्यवस्थाएं अभी भी बाद के प्रभावों से उबर रही हैं, निम्न तथा निम्न मध्यम-आय वाले देशों में नोवेल कोरोना वायरस महामारी के सामाजिक आर्थिक परिणाम अपरिवर्तनीय हैं।
- असमानता के बावजूद मुनाफाखोरी: फाइजर, बायोएनटेक तथा मॉडर्न जैसी कंपनियों ने कोविड-19 महामारी के पश्चात से अरबपतियों की नई संख्या का निर्माण किया एवं लाभ में 1,000 डॉलर प्रति सेकंड से अधिक कमाए, यहां तक कि उनके टीके कम आय वाले देशों में लोगों तक पहुंचे।
- मार्च 2022 तक, निम्न आय वाले देशों में मात्र 3% लोगों को कम से कम एक खुराक के साथ टीका लगाया गया था, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह 60.18% था।
- 2022 के मध्य तक कोविड-19 के प्रति विश्व की 70% आबादी का टीकाकरण करने का अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्य चूक गया क्योंकि निर्धन देश “कतार के पीछे” थे जब टीके लगाए गए थे।
- अपर्याप्त वित्तपोषण: जब विश्व के नेताओं ने एक डिजिटल अनुदान संग्रह समारोह (फंडरेजर) में एक कोरोना वायरस के टीके एवं उपचार विकसित करने के लिए € 7.4 बिलियन (8.07 बिलियन डॉलर) का वादा किया, तो संयुक्त राज्य अमेरिका ने कोई प्रतिनिधि नहीं भेजा इस प्रकार, असमानता भी महामारी के प्रवाह को लम्बा खींच रही है।
कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने में भारत की अग्रणी भूमिका
- कोविड-19 महामारी के प्रति भारत की प्रतिक्रिया एवं अपनी स्वयं की क्षमता का लाभ उठाकर वैश्विक साम्यता को पुनर्स्थापित करने के संपूर्ण विश्व के नीति निर्माताओं के लिए एक उदाहरण स्थापित किया है।
- भारत विश्व के लगभग 60% टीकों का उत्पादन करता है।
- भारत को संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक वैक्सीन क्रय का 60% -80% हिस्सा – स्वास्थ्य असमानता के विरुद्ध प्रतिबद्धता के साथ “वैक्सीन कूटनीति” या “वैक्सीन मैत्री” गठित करता है।
- भारत घरेलू उपयोग के लिए टीकों की कमी का सामना कर रहा था, तब भी टीकों एवं अन्य निदानों के शिपमेंट को जारी रखने के अपने संकल्प में बंधन मुक्त था।
- भारत में कोविड-19 के दूसरी लहर के चरम के दौरान केवल कुछ ही हफ्तों की अवधि थी जब वैक्सीन मिशन को रोक दिया गया था।
- 2021 तक, भारत ने – वैश्विक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए ‘मेड-इन-इंडिया’ कोविड-19 टीकों की 594.35 लाख खुराक 72 देशों को भेज दी।
- इनमें से 81.25 लाख खुराक उपहार थे, 339.67 लाख खुराक व्यावसायिक रूप से वितरित किए गए थे एवं 173.43 लाख खुराक गावी, वैक्सीन मैत्री के तत्वावधान में कोवैक्स कार्यक्रम के माध्यम से वितरित किए गए थे।
- भारत ने दक्षिण अफ्रीका के साथ, विश्व व्यापार संगठन को ‘सभी देशों को महामारी की अवधि के लिए कोविड-19 की दवाओं, टीकों, निदान एवं अन्य तकनीकों से संबंधित पेटेंट तथा अन्य बौद्धिक संपदा को न तो अनुदान देने एवं न ही लागू करने की अनुमति देने के लिए कहने का प्रस्ताव दिया, जब तक वैश्विक समुदाय प्रतिरक्षा हासिल न कर ले’।
- भले ही इस प्रस्ताव को कुछ प्रमुख देशों द्वारा सहयोग प्रदान करने से मना कर दिया गया था, किंतु जून 2022 में ही विश्व व्यापार संगठन ने कड़े प्रयासों के पश्चात कोविड-19 टीकों के निर्माण में बौद्धिक संपदा प्रतिबंधों को कम करने का निर्णय लिया गया।
एक आवश्यक वैश्विक महामारी संधि की आवश्यकता
- वैश्विक महामारी संधि को अंतिम रूप प्रदान करना: डब्लूएचओ की छत्रछाया में एक संधि, जैसा कि बीएमजे पत्रिका द्वारा प्रकाशित किया गया है, सामंजस्य का निर्माण करेगी एवं विखंडन से बचाएगी।
- इस तरह की संधि में उभरते हुए वायरस के डेटा साझाकरण तथा जीनोम अनुक्रमण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।
- इसे औपचारिक रूप से सरकारों एवं संसदों को एक आरंभिक चेतावनी प्रणाली तथा एक उचित रूप से वित्त पोषित त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध करना चाहिए।
- इसके अतिरिक्त, इसे राष्ट्र राज्यों को स्वास्थ्य निवेश एवं उन निवेशों पर वापसी से संबंधित सामान्य मात्रिकों (मीट्रिक) के एक समुच्चय पर सहमत होने हेतु प्रेरित करना चाहिए।
- इन निवेशों का उद्देश्य सार्वजनिक-निजी क्षेत्र के अंतर को कम करना होना चाहिए।
निष्कर्ष
- एक वैश्विक महामारी संधि न केवल राष्ट्र राज्यों में सामाजिक आर्थिक असमानताओं को कम करेगी बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए वैश्विक महामारी के प्रति तत्परता में भी वृद्धि करेगी। इसमें भारत को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।